श्वेता ने कहा, "माँ, तुम मुझे हमेशा कहते हो कि मैं तुम्हारी बेटी हूँ और तुम मेरी माँ हो, लेकिन मैं जानना चाहती हूँ कि अगर मैं तुम्हारी बहन होती तो क्या तुम मुझे उतनी ही प्यार करती जितना कि अब तुम मुझे करती हो?"

एक दिन, गाँव में एक साहित्यिक कार्यक्रम हुआ जिसमें अमृता को बुलाया गया। सीतल ने भी जाने का निश्चय किया। मंच पर खड़ी अमृता ने अपनी माँ की ओर देखा—सीतल की आंखों में गर्व और कृतज्ञता झलक रही थी। उसने अपनी कविता में माँ की उस मौन शक्ति को गूँजाया जिसने उसे पंख दिए थे। भीड़ ने तालियाँ बजाईं, पर असली तालियाँ तो माँ और बेटी के दिलों ने बजाईं—उनके बीच की दूरी अब हट चुकी थी।

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श्वेता ने कहा, "माँ, तुम मुझे हमेशा कहते हो कि मैं तुम्हारी बेटी हूँ और तुम मेरी माँ हो, लेकिन मैं जानना चाहती हूँ कि अगर मैं तुम्हारी बहन होती तो क्या तुम मुझे उतनी ही प्यार करती जितना कि अब तुम मुझे करती हो?"

एक दिन, गाँव में एक साहित्यिक कार्यक्रम हुआ जिसमें अमृता को बुलाया गया। सीतल ने भी जाने का निश्चय किया। मंच पर खड़ी अमृता ने अपनी माँ की ओर देखा—सीतल की आंखों में गर्व और कृतज्ञता झलक रही थी। उसने अपनी कविता में माँ की उस मौन शक्ति को गूँजाया जिसने उसे पंख दिए थे। भीड़ ने तालियाँ बजाईं, पर असली तालियाँ तो माँ और बेटी के दिलों ने बजाईं—उनके बीच की दूरी अब हट चुकी थी। mom with daughter story antarvasna hindi best